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नॉट्र डामः आग पर क़ाबू, पर 850 साल पुराने चर्च का गुंबद गिरा

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉं ने कहा है कि नॉट्र डाम चर्च में लगी आग के बाद उसे दोबारा बनाया जाएगा. पेरिस के 850 साल पुराने इस विश्वप्रसिद्ध चर्च में सोमवार शाम आग लग गई थी.
आग पर नौ घंटे बाद क़ाबू पा लिया गया है. चर्च की मुख्य इमारत और दोनों मीनारों को बचा लिया गया मगर आग से इसकी गुंबद और छत गिर गई.
पेरिस के इस मध्यकालीन चर्च में सोमवार शाम साढ़े छह बजे के पास आग लग गई और देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गई.
आग किस वजह से लगी, ये अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है. इस चर्च के नवीनीकरण का काम चल रहा था और अधिकारियों का मानना है कि बहुत हद तक संभव है कि आग इसी वजह से लगी हो.
आग को बुझाने की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन इस प्रमुख गिरिजाघर का शिखर और छत ढह गई है.
पिछले साल इस कैथोलिक चर्च को बचाने के लिए लोगों से आर्थिक सहयोग करने की अपील की गई थी. बेहद पुरानी होने के कारण इमारत जर्जर स्थिति में है.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनकी सारी संवेदनाए कैथोलिक लोगों और पूरे फ्रांस के लोगों के साथ हैं, जो इस दुर्घटना से आहत हुए हैं.
उन्होंने कहा, "मेरे पूरे देशवासियों की तरह मैं भी आज बहुत ही दुखी हूं. मुझे ये देखकर बहुत तकलीफ़ हो रही है कि हमारा एक हिस्सा जल रहा है."
राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने की ख़बर के बाद राष्ट्रपति ने देश के लोगों को संबोधित करने का पहले से तय कार्यक्रम रद्द कर दिया है.
गिरिजाघर से जुड़े एक प्रवक्ता ने बताया कि आग पूरे हिस्से में लगी है.
"वहां अब कुछ भी नहीं बचा है. बस अब ये जांचना बाकी है कि गिरिजाघर का गुंबद सुरक्षित है या नहीं."
पेरिस के मेयर एन हिडाल्गो घटनास्थल पर ही मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि आग बहुत भयानक थी. उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वो दमकलकर्मियों द्वारा बनाए गए सीमा-घेरे को पार न करें और उनके नियमों का पालन करें.
यह दुनिया के सबसे प्राचीन कैथेड्रल में से एक है. लाखों की संख्या में लोग हर साल यहां घूमने और प्रार्थना करने आते हैं. इमारत की दीवारों में दरारें नज़र आने लगी थीं जिसके बाद से इमारत के नवीनीकरण का काम किया जा रहा था.
अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है.
बीबीसी संवाददाता हेनरी एस्टियर के मुताबिक, फ्रांस की कोई भी इमारत फ्रांस को उस तरह से पेश नहीं करती है जिस तरह से नोट्र डाम गिरिजाघर की इमारत करती है. ये भी कह सकते हैं कि अगर पेरिस के आइफ़ल टावर को कोई इमारत टक्कर देती है तो यही वो इमारत है. देश की एक महान साहित्यिक कृति का नाम भी इसी इमारत के नाम पर है. विक्टर ह्यूगो की 'द हंचबैक ऑफ़ नॉट्र डाम' को नॉट्र डाम द पेरिस के नाम से जाना जाता है.
फ्रांसीसी क्रांति के वक़्त इस इमारत को बहुत नुक़सान उठाना पड़ा था. इस इमारत ने दो विश्व युद्ध देखे हैं.
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तपती धूप में पाँच कारों का क़ाफ़िला ओडिशा के नंदनकानन के एक गांव से धीमी रफ़्तार में गुज़र रहा है.
आगे वाली खुली जीप में एक महिला खड़ी हुई है और झुक झुक कर लोगों से हाथ मिलते वक़्त उड़िया भाषा में कहती हैं, "पहले कोई नहीं आया तो क्या हुआ, हम तो आए हैं. बस मोदी जी को याद रखना".
फ़र्राटेदार ओडिया बोलने वाली इन महिला का नाम अपराजिता सारंगी है जो बिहार की मूल निवासी हैं और जिन्हें भाजपा ने भुवनेश्वर लोक सभा सीट से टिकट दिया है.
अपराजिता पूर्व आईएएस अधिकारी हैं जिन्होंने कुछ दिनों पहले वीआरएस ले लिया था.
उन्होंने कहा,"मैं राजनीति में दो कारणों से आई. पहला, मोदी जी और अमित शाह का नेतृत्व और दूसरा कुछ असल काम करने की चाह. वोट माँगते समय सबसे कहती हूँ कि इस राज्य में पिछले कई वर्षों से हर चीज़ के अस्थायी समाधान दिए जा रहे हैं जिन्हें बंद कर भाजपा की सरकार आनी चाहिए".
क़रीब 10 वर्ष पहले तक तो नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (बीजेडी) से पार्टी का गठबंधन था. उन दिनों प्रदेश में भाजपा से ज़्यादा लोग बीजेडी को ही जानते थे.
पिछले आम चुनावों में भी भाजपा को ओडिशा में करारी शिकस्त मिली थी.
प्रदेश की 21 लोक सभा सीटों में से पार्टी के पास मात्र एक सीट है और 147 सदस्यों वाली विधान सभा में बमुश्किल से 10 विधायक हैं.
अगर विधायकों की बात हो तो कांग्रेस के पास भाजपा से ज़्यादा विधायक हैं.
चुनाव जीतने के साथ ही नरेंद्र मोदी कैबिनेट में ओडिशा के दो नेताओं, धर्मेंद्र प्रधान और जुअल ओरम, को जगह मिली और निर्देश भी कि 'मिशन ओडिशा' अब अगला पड़ाव है.
हालाँकि, राज्य के बड़े हिस्सों में इन दोनों नेताओं की कोई राजनीतिक ख़ास करिश्मा नहीं रहा है, लेकिन फिर भी प्रदेश में पार्टी के बड़े फ़ैसले धर्मेंद्र प्रधान लेते रहे हैं.
पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बीबीसी से हुई बातचीत में उस दौर की कमियों पर भी बात की.

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